उर्मीला हॉस्पिटल ने पैरालिसिस मरीजो को दिया जीवनदान…समय पर पहुंचे अस्पताल, आधुनिक उपचार से टला बड़ा खतरा

 

ग्राम कुर्रा, धमतरी निवासी 61 वर्षीय गोकुलराम के लिए एक दिन अचानक जिंदगी का सबसे कठिन दौर बन गया, जब उन्हें पैरालिसिस का तेज अटैक आया। अटैक के बाद उनके शरीर का बायां हिस्सा पूरी तरह काम करना बंद कर चुका था। गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों ने बिना देर किए उर्मिला हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. छत्रपाल साहू से संपर्क किया।

डॉ. साहू ने मरीज की स्थिति का तत्काल आकलन करते हुए अस्पताल बुलाया और एमआरआई जांच कराई। जांच में पता चला कि मस्तिष्क की रक्त वाहिका में थक्का जमने से रक्त प्रवाह रुक गया था, जिसके कारण ब्रेन की कोशिकाएं प्रभावित होने लगी थीं और शरीर का बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था।

आईवी थ्राम्बोलाइसिस से मिला चमत्कारिक फायदा

जांच रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद मरीज का इलाज आईवी थ्राम्बोलाइसिस तकनीक से शुरू किया गया। समय रहते उपचार मिलने का असर इतना सकारात्मक रहा कि जो मरीज एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचा था, वह इलाज के बाद अपने पैरों पर चलकर घर लौटा।

क्या है आईवी थ्राम्बोलाइसिस, कैसे बचाती है मरीज की जान

डॉ. छत्रपाल साहू ने बताया कि इस्केमिक स्ट्रोक में मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका में थक्का बनने से रक्त संचार रुक जाता है। यदि समय पर उपचार नहीं मिले तो ब्रेन की कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं।

आईवी थ्राम्बोलाइसिस प्रक्रिया में नस के जरिए विशेष दवाएं दी जाती हैं, जो रक्त वाहिका में जमे थक्के को घोलने का काम करती हैं। इससे मस्तिष्क में दोबारा रक्त प्रवाह शुरू हो जाता है और प्रभावित अंगों की कार्यक्षमता लौटने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि यह उपचार केवल लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर ही प्रभावी माना जाता है। इसके बाद मरीज को कम से कम 24 घंटे तक विशेषज्ञ निगरानी में रखा जाता है।

साढ़े चार घंटे की देरी भी पड़ सकती है भारी

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. छत्रपाल साहू का कहना है कि वर्तमान समय में पैरालिसिस के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन यदि मरीज को अटैक आने के साढ़े चार घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाकर उपचार शुरू कर दिया जाए तो गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। देर होने पर मरीज को जीवनभर बिस्तर पर रहने की नौबत भी आ सकती है।

200 से ज्यादा मरीजों का सफल उपचार, जागरूकता सबसे बड़ा इलाज

डॉ. साहू ने बताया कि अब तक करीब 200 स्ट्रोक मरीजों का उपचार किया जा चुका है। इनमें से अधिकांश मरीज आज सामान्य रूप से अपने पैरों पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक दवाओं और समय पर उपचार से स्ट्रोक के मरीजों को तेजी से राहत मिल सकती है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि पैरालिसिस के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही झाड़-फूंक या घरेलू उपायों में समय बर्बाद न करें। मरीज को तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचाएं। समय पर लिया गया सही निर्णय किसी व्यक्ति की जान बचाने के साथ उसे स्थायी विकलांगता से भी बचा सकता है।

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