रोजगार के नाम पर बच्चों को ले जाने का मामला, बस में मिले मासूमों ने खोला बड़ा राज

 दुर्ग। बाल श्रम और बच्चों को अवैध तरीके से बाहर ले जाने की आशंका के बीच दुर्ग में बड़ी कार्रवाई की गई है। राज्य बाल आयोग से मिली सूचना के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन, स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट और पुलिस की संयुक्त टीम ने दुर्ग बस स्टैंड पर एक बस की जांच कर 16 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया।प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इनमें 7 बच्चे नाबालिग हैं, जबकि 9 की उम्र 18 वर्ष से अधिक है। सभी बच्चे कबीरधाम जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि बच्चों को काम दिलाने का झांसा देकर यहां लाया गया था।

रायपुर के नाम पर बुलाया, फिर पहुंचा दिया दुर्ग

चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम को सूचना मिली थी कि रायपुर से आ रही एक बस में कई बच्चों को काम के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना के बाद टीम दुर्ग बस स्टैंड पर पहले से मौजूद थी।रात करीब साढ़े आठ बजे जैसे ही बस पहुंची, टीम ने उसमें मौजूद बच्चों से पूछताछ की। बच्चों ने बताया कि उन्हें पहले रायपुर में काम दिलाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में उन्हें दुर्ग भेज दिया गया।कुछ बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें यह तक जानकारी नहीं थी कि उन्हें आखिर किस जगह ले जाया जा रहा है और वहां उनसे किस तरह का काम कराया जाएगा।

भूखे मिले बच्चे, जांच के बाद सामने आई नौकरी के झांसे की कहानी

रेस्क्यू किए गए बच्चों की हालत देखकर अधिकारियों ने सबसे पहले उनके खाने और पानी की व्यवस्था की। इसके बाद उनकी उम्र और पहचान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई।कुछ बच्चों के पास आधार कार्ड मिले, जबकि कुछ ने अपनी उम्र खुद बताई। पूछताछ में कई बच्चों ने बताया कि उन्हें मशरूम फैक्ट्री में काम दिलाने का भरोसा दिया गया था।वहीं, कुछ बच्चों ने दावा किया कि उन्हें उत्तर प्रदेश में 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन वाली नौकरी का लालच दिया गया था।

बच्चों को लेने पहुंचा व्यक्ति हिरासत में, कई सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस

बस स्टैंड पर बच्चों को लेने पहुंचे एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चों को कहां ले जाने की योजना थी और इस पूरे मामले में उसकी क्या भूमिका है।पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बच्चों को दुर्ग में काम पर लगाया जाना था या उन्हें किसी दूसरे राज्य भेजने की तैयारी थी।मामले में बाल श्रम और मानव तस्करी से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

नाबालिग बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने किया जाएगा पेश

रेस्क्यू किए गए 7 नाबालिग बच्चों को फिलहाल सुरक्षित आश्रय गृह में रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाएगा।समिति के निर्देश के बाद बच्चों के पुनर्वास और आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि बच्चों को भेजने के पीछे कौन लोग शामिल हैं।जांच में यदि बाल श्रम या बच्चों की तस्करी के प्रमाण मिलते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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