धान सहित इन फसलों को किया गया है शामिल
सक्ती जिले में खरीफ मौसम के लिए धान सिंचित, धान असिंचित, मक्का, उड़द और मूंगफली फसलों को बीमा योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है।कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी जोखिमों को देखते हुए समय पर अपनी फसलों का बीमा जरूर कराएं, ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचाव हो सके।
प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान पर मिलेगी आर्थिक सहायता
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को कई तरह के नुकसान की स्थिति में सहायता दी जाती है। इसमें फसल की बुवाई नहीं हो पाना, पौध रोपाई में असफलता, सूखा, जलभराव, ओलावृष्टि जैसी स्थानीय प्राकृतिक आपदाएं और कटाई के बाद होने वाले नुकसान शामिल हैं।यदि किसी किसान की फसल खराब होती है तो वह इसकी सूचना केंद्र सरकार के कृषि रक्षक पोर्टल या टोल फ्री नंबर 14447 पर दे सकता है। फसल नुकसान की जानकारी 72 घंटे के भीतर दर्ज कराना जरूरी होगा।
मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों से अपील
उप संचालक कृषि, सक्ती ने बताया कि इस साल अल-नीनो के संभावित प्रभाव के कारण मौसम में बदलाव की संभावना बनी हुई है। मानसून में देरी, जल्दी वापसी या फसल अवधि में लंबे समय तक बारिश नहीं होने जैसी परिस्थितियां किसानों के लिए जोखिम बढ़ा सकती हैं।उन्होंने बताया कि जिले में इस वर्ष अब तक 619.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 729.5 मिलीमीटर वर्षा हुई थी।ऐसे में किसानों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए फसल बीमा को महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बताया गया है।
ऋणी और गैर ऋणी किसान ऐसे करा सकते हैं बीमा
जिन किसानों ने कृषि ऋण लिया है, वे अपने संबंधित सेवा सहकारी समिति या बैंक के माध्यम से फसल बीमा के लिए पंजीयन करा सकते हैं।वहीं, गैर ऋणी किसान लोक सेवा केंद्र, बैंक, वित्तीय संस्थान या बजाज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधियों से संपर्क कर बीमा करा सकते हैं। किसान स्वयं भी भारत सरकार के प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।बीमा कराने के लिए किसानों को आधार कार्ड, बैंक पासबुक, ऋण पुस्तिका, बी-1 और पी-2 सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज साथ रखने होंगे। इसके अलावा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सीएससी सेंटर या संबंधित बैंक से भी सहायता ली जा सकती है।