
नई दिल्ली। सोने में निवेश करने वाले लोगों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की एक सीरीज ने शानदार रिटर्न दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 सीरीज VII के समय से पहले भुगतान के लिए ₹14,614 प्रति ग्राम की कीमत निर्धारित की है। अक्टूबर 2020 में ऑनलाइन माध्यम से ₹5,001 प्रति ग्राम की दर पर निवेश करने वालों को अब प्रति ग्राम ₹9,613 का पूंजीगत लाभ मिल सकता है। इस तरह निवेश की रकम में करीब 192.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा निवेशकों को बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज से भी कमाई हुई है।
19 अक्टूबर को बॉन्ड भुनाने का मौका, जानें RBI का फैसला
भारतीय रिजर्व बैंक ने 16 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 सीरीज VII के समय से पहले रिडेम्प्शन की तारीख 19 अक्टूबर 2026 तय की है। इस सीरीज को 20 अक्टूबर 2020 को जारी किया गया था।सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की सामान्य अवधि आठ साल होती है। हालांकि, पांच साल पूरे होने के बाद ब्याज भुगतान की निर्धारित तारीखों पर निवेशकों को समय से पहले बॉन्ड भुनाने की सुविधा मिलती है। इस बार 20 अक्टूबर को अवकाश होने के कारण रिडेम्प्शन की तारीख एक दिन पहले रखी गई है।ध्यान देने वाली बात यह है कि समय से पहले भुगतान का लाभ निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार पात्र निवेशकों को ही मिलेगा।
₹5,001 का निवेश अब ₹14,614 प्रति ग्राम के बराबर
इस सीरीज के लिए सरकार ने शुरुआती इश्यू प्राइस ₹5,051 प्रति ग्राम रखा था। ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल भुगतान करने वाले निवेशकों को ₹50 प्रति ग्राम की छूट मिली, जिससे उनकी खरीद कीमत ₹5,001 प्रति ग्राम रह गई।
RBI की ओर से तय नई रिडेम्प्शन कीमत के आधार पर निवेश का हिसाब इस प्रकार है।
ऑनलाइन निवेश की खरीद कीमत: ₹5,001 प्रति ग्राम
रिडेम्प्शन कीमत: ₹14,614 प्रति ग्राम
प्रति ग्राम पूंजीगत लाभ: ₹9,613
खरीद मूल्य के मुकाबले बढ़ोतरी: लगभग 192.22 प्रतिशत
वहीं, जिन निवेशकों ने बिना डिजिटल भुगतान वाली छूट के ₹5,051 प्रति ग्राम की दर से बॉन्ड खरीदे थे, उन्हें प्रति ग्राम ₹9,563 का पूंजीगत लाभ मिलेगा।
₹1 लाख लगाने वालों को कितनी रकम मिलेगी?
अक्टूबर 2020 में इस सीरीज में ऑनलाइन माध्यम से करीब ₹1 लाख निवेश करने वाले व्यक्ति के निवेश का मूल्य अब लगभग ₹2.92 लाख हो सकता है। इसमें करीब ₹1.92 लाख का पूंजीगत लाभ शामिल है।यह गणना केवल बॉन्ड के खरीद मूल्य और रिडेम्प्शन मूल्य के आधार पर की गई है। इसमें ब्याज से हुई कमाई, लागू कर और अन्य संभावित खर्च शामिल नहीं हैं। इसलिए निवेशक को मिलने वाली अंतिम रकम उसकी वास्तविक निवेश राशि और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
सोने की कीमत बढ़ने के साथ ब्याज से भी कमाई
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की खासियत यह है कि इसमें निवेशक को सोने की कीमत में बढ़ोतरी का लाभ मिलने के साथ निश्चित ब्याज भी मिलता है। इस सीरीज पर शुरुआती निवेश राशि के आधार पर सालाना 2.5 प्रतिशत ब्याज निर्धारित था।ब्याज का भुगतान हर छह महीने में किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक ने 10 ग्राम गोल्ड बॉन्ड ₹50,010 में खरीदे थे, तो शुरुआती निवेश राशि के आधार पर उसे सालाना लगभग ₹1,250 ब्याज मिल सकता था। छह साल में यह रकम करीब ₹7,500 बनती है, बशर्ते निवेश पूरे समय बना रहा हो और भुगतान निर्धारित दर के अनुसार हुआ हो।इस तरह कुल रिटर्न में सोने की कीमत से मिलने वाले लाभ के साथ ब्याज की कमाई भी जुड़ती है।
RBI किस आधार पर तय करता है रिडेम्प्शन की कीमत?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के भुगतान मूल्य का निर्धारण भारतीय रिजर्व बैंक करता है। इसके लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की ओर से प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के भाव को आधार बनाया जाता है।रिडेम्प्शन की तारीख से पहले के तीन कारोबारी दिनों के बंद भाव का औसत निकालकर प्रति ग्राम भुगतान मूल्य निर्धारित किया जाता है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 14, 15 और 16 अक्टूबर 2026 के भाव के आधार पर इस सीरीज के लिए ₹14,614 प्रति ग्राम की कीमत तय की गई है।
गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स के नियम समझना भी जरूरी
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से होने वाली कमाई पर कर संबंधी नियमों को समझना निवेशकों के लिए जरूरी है। रिपोर्ट में बजट 2026 के बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि समय से पहले रिडेम्प्शन पर मिलने वाले पूंजीगत लाभ की कर छूट अब पहले जैसी नहीं है।रिपोर्ट के अनुसार, मूल इश्यू से बॉन्ड खरीदने वाले पात्र व्यक्तिगत निवेशकों को निर्धारित शर्तों के तहत आठ साल की पूरी मैच्योरिटी अवधि तक निवेश बनाए रखने पर पूंजीगत लाभ में कर छूट मिल सकती है। बॉन्ड से मिलने वाला ब्याज लागू आयकर नियमों के अनुसार कर योग्य होता है।निवेशकों को अपनी स्थिति के अनुसार मौजूदा कर प्रावधानों की पुष्टि आधिकारिक अधिसूचना या कर विशेषज्ञ से कर लेनी चाहिए।
क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड भारत सरकार की ओर से जारी की जाने वाली ऐसी निवेश योजना है, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक सरकार की ओर से बॉन्ड जारी करता है। इसका मूल्य सोने की कीमत से जुड़ा होता है और निवेश ग्राम के आधार पर किया जाता है।इस योजना में निवेश करने के लिए भौतिक सोना खरीदकर रखने की जरूरत नहीं होती। इससे सोने की सुरक्षा, लॉकर और शुद्धता से जुड़ी कुछ परेशानियों से बचा जा सकता है। बॉन्ड भुनाने पर निर्धारित नियमों के अनुसार रुपये में भुगतान मिलता है।हालांकि, यह निवेश पूरी तरह जोखिममुक्त नहीं है। सोने की बाजार कीमत घटने पर रिडेम्प्शन के समय निवेश का मूल्य कम भी हो सकता है। इसलिए इस सीरीज में मिला ऊंचा रिटर्न भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 सीरीज VII में निवेश करने वालों के लिए निर्धारित रिडेम्प्शन मूल्य के आधार पर अच्छा पूंजीगत लाभ सामने आया है। लेकिन अंतिम भुगतान, ब्याज और टैक्स का आकलन करते समय निवेश की वास्तविक कीमत, बॉन्ड की पात्रता और लागू नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है।






