छत्तीसगढ़ में शस्त्र पूजा के दौरान फायरिंग पर विवाद, एसपी अंकिता शर्मा को ही नोटिस मिलने से उठे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विजयादशमी के मौके पर हुई शस्त्र पूजा अब पुलिस विभाग के लिए विवाद की वजह बन गई है। राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक आईपीएस अंकिता शर्मा का AK-47 से हवा में फायरिंग करते हुए वीडियो सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। लेकिन दूसरे जिलों से भी पुलिस अधिकारियों के फायरिंग करते हुए वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि कार्रवाई केवल अंकिता शर्मा के खिलाफ ही क्यों की गई।रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर समेत कई जिलों से ऐसे वीडियो सामने आने की खबरों ने विभागीय कार्रवाई में समानता को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल अंकिता शर्मा से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनके जवाब के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

शस्त्र पूजा के बाद AK-47 से की गई फायरिंग

यह घटना 20 अक्टूबर 2026 की बताई गई है। विजयादशमी के अवसर पर राजनांदगांव पुलिस लाइन में शस्त्र पूजा का आयोजन हुआ था। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने हथियारों तथा वाहनों की पूजा की। कार्यक्रम के बाद एसपी अंकिता शर्मा ने AK-47 राइफल से हवा में कई राउंड फायर किए।सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अंकिता शर्मा साड़ी पहने राइफल चलाती नजर आती हैं। उनके आसपास अन्य पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी दिखाई देते हैं। वीडियो सामने आने के बाद हथियारों के इस्तेमाल और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठने लगे। कुछ लोगों ने इसे दशहरे की परंपरा से जोड़ा, जबकि कुछ ने लोगों की मौजूदगी में फायरिंग को जोखिम भरा बताया।

एएसपी कीर्तन राठौर का वीडियो भी आया सामने

मामले के बीच एक अन्य वीडियो भी सामने आया, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर AK-47 से फायरिंग करते दिखाई दिए। इसके बाद चर्चा शुरू हुई कि क्या शस्त्र पूजा के दौरान फायरिंग केवल एसपी ने की थी या दूसरे अधिकारी भी इसमें शामिल थे।अलग-अलग जिलों से सामने आए वीडियो ने मामले को और व्यापक बना दिया है। अब यह सवाल भी अहम हो गया है कि सभी घटनाओं में सुरक्षा के क्या इंतजाम थे और क्या हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन किया गया था।

रायपुर से बस्तर तक कई जिलों के वीडियो का दावा

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राजनांदगांव के अलावा रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर से भी शस्त्र पूजा के बाद फायरिंग के वीडियो सामने आए हैं। कुछ वीडियो में पुलिस अधिकारी राइफल से हवा में गोली चलाते नजर आते हैं।हालांकि, सभी वीडियो में इस्तेमाल किए गए कारतूसों, घटनाओं की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में समान जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए हर घटना को एक जैसा मानना उचित नहीं होगा। इसके बावजूद कई जिलों से ऐसे दृश्य सामने आने के बाद केवल एक अधिकारी को नोटिस दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

22 अक्टूबर को अंकिता शर्मा को जारी हुआ नोटिस

छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने 22 अक्टूबर को राजनांदगांव की एसपी अंकिता शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया। राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अजय यादव ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि फायरिंग से जुड़े वीडियो और हथियारों के इस्तेमाल के नियमों को ध्यान में रखते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।आईजी के अनुसार, अंकिता शर्मा का जवाब मिलने के बाद उसे अपनी टिप्पणी के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाएगा। इसके बाद विभाग आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।गौरतलब है कि नोटिस जारी होने का अर्थ किसी अधिकारी को अंतिम रूप से दोषी ठहराना नहीं है। फिलहाल एसपी से जवाब मांगा गया है। उनके खिलाफ किसी अंतिम दंडात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरे अधिकारियों को नोटिस क्यों नहीं मिला?

इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल यह है कि दूसरे जिलों में हुई फायरिंग के मामलों में क्या कदम उठाए गए हैं। 23 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया कि अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी नहीं किए गए हैं।रिपोर्ट के अनुसार, अंकिता शर्मा का वीडियो सोशल मीडिया पर अधिक प्रसारित हुआ और इससे पुलिस की छवि पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका के कारण उनसे जवाब मांगा गया।इस जानकारी के बाद विभागीय कार्रवाई के आधार पर बहस शुरू हो गई है। सवाल है कि कार्रवाई किसी वीडियो के अधिक वायरल होने के कारण होनी चाहिए या फिर हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों की जांच सभी संबंधित मामलों में समान रूप से की जानी चाहिए।हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि दूसरे अधिकारियों ने भी समान परिस्थितियों में नियमों का उल्लंघन किया या उनके मामलों की जांच नहीं हुई। इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित घटनाओं की जांच के बाद ही मिल सकेगी।

शस्त्र पूजा और फायरिंग में है अंतर

विजयादशमी पर शस्त्र पूजा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। पुलिस विभाग की कई इकाइयों में भी इस अवसर पर हथियारों और वाहनों की पूजा की जाती है। लेकिन शस्त्रों की पूजा करना और उनसे फायरिंग करना अलग-अलग गतिविधियां हैं।सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके विज ने कहा कि शस्त्र पूजा के दौरान हथियार चलाना अनिवार्य नहीं है। उनके मुताबिक, फायरिंग केवल सुरक्षित स्थानों पर और जरूरी सावधानियों के साथ की जानी चाहिए।इस मामले में प्रमुख चिंता किसी अधिकारी के पहनावे या पूजा में शामिल होने की नहीं, बल्कि हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन की है।

क्या फायरिंग में असली गोलियों का इस्तेमाल हुआ?

वीडियो वायरल होने के बाद यह सवाल भी उठा कि फायरिंग के दौरान वास्तविक गोलियां चलाई गई थीं या केवल आवाज पैदा करने वाले ब्लैंक राउंड इस्तेमाल किए गए थे।एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, शस्त्र पूजा के दौरान कभी-कभी आवाज करने वाले कारतूसों का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकारी ने दावा किया कि ऐसे आयोजनों में वास्तविक गोलियां नहीं चलाई जातीं। हालांकि, अंकिता शर्मा और दूसरे अधिकारियों के वीडियो में इस्तेमाल हुए कारतूसों की तकनीकी पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।ब्लैंक राउंड में सामान्य गोली की तरह कोई प्रक्षेप्य बाहर नहीं निकलता, लेकिन फायरिंग के दौरान हथियार के मुंह से गर्म गैस और अन्य पदार्थ निकल सकते हैं। इसलिए ऐसे कारतूसों का इस्तेमाल भी जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं होता और सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी रहता है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी दिया बयान

विवाद सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव से भी इस बारे में सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय का संज्ञान लेगी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से अंकिता शर्मा को नोटिस जारी किए जाने की पुष्टि हुई।अब निगाहें इस बात पर हैं कि विभाग जांच को केवल राजनांदगांव तक सीमित रखेगा या दूसरे जिलों से सामने आए वीडियो की परिस्थितियों की भी समीक्षा करेगा।

परंपरा के साथ सार्वजनिक सुरक्षा भी जरूरी

शस्त्र पूजा के दौरान फायरिंग का मामला अब एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। इससे तीन अहम सवाल सामने आए हैं: क्या हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन हुआ, क्या आयोजन में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे और क्या विभाग सभी संबंधित मामलों में एक समान मानदंड अपनाएगा?अंकिता शर्मा के जवाब और वरिष्ठ अधिकारियों के फैसले के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल इस घटनाक्रम ने पुलिस विभाग में अनुशासन, परंपरा और हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

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