अगस्त की बारिश ने बदली छत्तीसगढ़ के बांधों की तस्वीर, 88% से ज्यादा हुआ जलभराव; जानें आपके इलाके के जलाशय का हाल

 छत्तीसगढ़:  अगस्त के दौरान हुई लगातार बारिश का असर अब बांधों और जलाशयों के जलस्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश के कई बड़े, मध्यम और छोटे जलाशय लगभग भर चुके हैं। कुछ जलाशयों में क्षमता के करीब पानी पहुंचने के बाद अतिरिक्त पानी भी छोड़ा जा रहा है।

प्रदेश के बांधों में औसत जल भंडारण 88 फीसदी से अधिक हो गया है। 30 जुलाई को यह आंकड़ा करीब 79 फीसदी था। यानी सिर्फ अगस्त महीने में औसत जल भंडारण में लगभग 9 फीसदी की वृद्धि हुई है।

कई जलाशय 90 फीसदी से ज्यादा भरे

अच्छी बारिश का असर प्रदेश के लगभग सभी संभागों में देखने को मिल रहा है। बिलासपुर का खारंग जलाशय 100 फीसदी भर चुका है। धमतरी के रविशंकर जलाशय में भी 90 फीसदी से अधिक पानी पहुंच गया है, जिसके बाद यहां से पानी छोड़ा गया।

गंगरेल जलाशय के जलस्तर में भी एक महीने के भीतर करीब 23 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं मुरुमसिल्ली और कोडार जैसे जलाशयों में भी पानी की स्थिति काफी मजबूत हुई है।

दो बड़े बांध अब भी 50 फीसदी से नीचे

प्रदेश के ज्यादातर बांधों में स्थिति बेहतर होने के बावजूद दो प्रमुख जलाशय अभी भी आधी क्षमता तक नहीं भर पाए हैं। बिलासपुर जिले के अरपा भैंसाझार में 37.42 फीसदी और रायगढ़ के केलो बांध में 37.03 फीसदी जलभराव दर्ज किया गया है।

केलो बांध में जुलाई के मुकाबले अगस्त में जलस्तर घटा है, जबकि अरपा भैंसाझार में बढ़ोतरी हुई है।

एक महीने में कहां कितना बदला जलस्तर

जलाशय/बांध31 जुलाई30 अगस्त
मिनीमाता बांगो83.35%90.78%
गंगरेल67.82%90.72%
तांदुला66.58%78.73%
दुधावा93.59%82.37%
सिकासार93.97%81.43%
खारंग100%100%
सोंदूर68.77%84.56%
मुरुमसिल्ली84.33%98.82%
कोडार87.90%100%
मनियारी100%100%
केलो40.45%37.03%
अरपा भैंसाझार25.14%37.42%

नोट: उपलब्ध आंकड़ों में कोडार बांध का एक अतिरिक्त रिकॉर्ड भी दिया गया है, जिसमें 100 फीसदी जलभराव दर्ज है।

छोटे जलाशयों में भी तेजी से बढ़ा पानी

मध्यम और लघु जलाशयों की स्थिति में भी बारिश के बाद बड़ा सुधार हुआ है। राजनांदगांव का मोंगरा बैराज इसका प्रमुख उदाहरण है। यहां 22 जुलाई तक जलस्तर लगभग शून्य था, लेकिन इसके बाद हुई बारिश से यह करीब 76 फीसदी तक पहुंच गया।

अधिकांश मध्यम और छोटे जलाशयों में 70 से 99 फीसदी तक पानी दर्ज किया गया है। हालांकि कांकेर का मायना जलाशय और रायगढ़ का किंकारीनाला अभी 50 फीसदी के स्तर तक नहीं पहुंच सके हैं।

तीन साल में इस बार सबसे बेहतर स्थिति

30 अगस्त के आंकड़ों की तुलना करें तो इस साल बांधों में औसत जल भंडारण पिछले दो वर्षों से बेहतर है। 2024 में इसी तारीख को औसत जल भंडारण करीब 85 फीसदी और 2025 में करीब 84 फीसदी था। इस वर्ष यह आंकड़ा 88 फीसदी से अधिक पहुंच गया है।

आने वाले साल के लिए भी राहत के संकेत

महासमुंद जिले का कोडार बांध भी लंबे समय बाद 100 फीसदी जलभराव तक पहुंचा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अच्छी बारिश से मौजूदा जल उपलब्धता की स्थिति मजबूत हुई है। साथ ही जलाशयों में पर्याप्त भंडारण होने से अगले वर्ष के लिए भी पानी की उपलब्धता को लेकर उम्मीद बढ़ी है।

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