Bilaspur High Court News: HPCL का फैसला बरकरार, लेकिन लापरवाही पर कंपनी को देना होगा 1 लाख रुपये मुआवजा

 Bilaspur High Court : बिलासपुर हाईकोर्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की ओर से एक महिला आवेदक की ग्रामीण पेट्रोल पंप डीलरशिप रद्द किए जाने के फैसले को वैध माना है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि कंपनी की देरी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण आवेदक को आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ा, इसलिए एचपीसीएल को एक लाख रुपये का मुआवजा देना होगा।

राज्य राजमार्ग पर नहीं खुल सकता ग्रामीण पेट्रोल पंप

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की डीलर चयन नीति के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, एक्सप्रेस वे या नगरीय क्षेत्र में ग्रामीण श्रेणी का रिटेल आउटलेट स्थापित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर आशय पत्र रद्द करने का निर्णय कानून के अनुरूप माना गया।

2018 में किया था आवेदन

एचपीसीएल ने 14 दिसंबर 2018 को छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रिटेल आउटलेट डीलरशिप के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। अनंता चौधरी ने सरायपाली-पदमपुर मार्ग स्थित ग्राम नवागांव की भूमि का प्रस्ताव देकर ओपन श्रेणी में आवेदन किया था।

दस्तावेजों की जांच और स्थल निरीक्षण के बाद कंपनी ने 29 दिसंबर 2020 को उनके नाम आशय पत्र जारी कर दिया।

एलओआई मिलने के बाद किया लाखों रुपये का निवेश

आशय पत्र मिलने के बाद महिला ने सुरक्षा राशि के रूप में पांच लाख रुपये और 3.60 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट जमा किए। इसके अलावा जिला प्रशासन से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया, भूमि का सीमांकन कराया, बैंक से ऋण लेकर निर्माण कार्य शुरू कराया और बिजली ट्रांसफार्मर भी स्थापित करा दिया।

पेट्रोल पंप शुरू होने से पहले रद्द हुआ आशय पत्र

निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बाद 31 दिसंबर 2021 को एचपीसीएल ने नोटिस जारी कर बताया कि प्रस्तावित भूमि राज्य राजमार्ग क्रमांक 16 पर स्थित है और इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा। महिला ने जवाब में दावा किया कि भूमि ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत आती है, लेकिन कंपनी ने जवाब अस्वीकार करते हुए एक फरवरी 2022 को आशय पत्र निरस्त कर दिया और जमा डिमांड ड्राफ्ट वापस कर दिए। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कंपनी ने नियमों का दिया हवाला

एचपीसीएल ने अदालत में कहा कि डीलर चयन दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्रामीण पेट्रोल पंप राज्य राजमार्ग या राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थापित नहीं किए जा सकते। प्रारंभिक जांच के दौरान यह तथ्य सामने नहीं आया था, लेकिन बाद में सत्यापन में भूमि राज्य राजमार्ग पर होने की पुष्टि हुई, इसलिए आशय पत्र रद्द करना आवश्यक था।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर सुनाया फैसला

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि नियमों के विपरीत जाकर पेट्रोल पंप संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती, इसलिए एचपीसीएल द्वारा आशय पत्र रद्द करना उचित है। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि यदि कंपनी समय रहते आवश्यक जांच कर लेती तो आवेदक को अनावश्यक आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एचपीसीएल को महिला आवेदक को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।

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