
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सरकारी राशन दुकान के स्टॉक की जांच के दौरान बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कोतरा रोड थाना क्षेत्र के पचेड़ा गांव स्थित उचित मूल्य दुकान में चावल, शक्कर और नमक की कुल 3 लाख 22 हजार 193 रुपये की कमी पाई गई। ई-पॉस मशीन में दर्ज स्टॉक और दुकान में मौजूद खाद्यान्न का मिलान करने पर यह अंतर सामने आया। खाद्य निरीक्षक की शिकायत पर पुलिस ने दुकान का संचालन करने वाले जय मां दुर्गा महिला समूह के पदाधिकारियों, सदस्यों और विक्रेता के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में मिला अंतर
जानकारी के अनुसार, खाद्य निरीक्षक ने 21 तारीख को पचेड़ा गांव की शासकीय उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण किया था। इस दौरान दुकान में उपलब्ध चावल, शक्कर और नमक का भौतिक सत्यापन किया गया। जब वास्तविक मात्रा की तुलना ई-पॉस मशीन में दर्ज स्टॉक से की गई, तो खाद्यान्न की बड़ी कमी सामने आई।
72 क्विंटल से अधिक चावल की कमी
खाद्य विभाग के सत्यापन में दुकान में उपलब्ध खाद्यान्न और रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा के बीच यह अंतर पाया गया:
- चावल: रिकॉर्ड में 120.03 क्विंटल के मुकाबले दुकान में 48 क्विंटल उपलब्ध मिला। कुल कमी 72.03 क्विंटल रही।
- शक्कर: रिकॉर्ड के अनुसार 5.44 क्विंटल होना चाहिए था, जबकि मौके पर 1.50 क्विंटल मिला। कमी 3.94 क्विंटल दर्ज की गई।
- नमक: रिकॉर्ड में 5.99 क्विंटल के मुकाबले 4.50 क्विंटल मिला। इसमें 1.49 क्विंटल की कमी पाई गई।
खाद्य विभाग ने कम पाए गए खाद्यान्न का कुल मूल्य 3,22,193 रुपये आंका है।
महिला समूह के पदाधिकारियों और विक्रेता पर कार्रवाई
स्टॉक में अंतर मिलने के बाद खाद्य निरीक्षक ने कोतरा रोड थाने में लिखित शिकायत दी। इसके आधार पर पुलिस ने जय मां दुर्गा महिला समूह की अध्यक्ष सेवतीन चौहान, सचिव जमुना सिदार और सदस्य जानकी पटेल, कमला सिदार, प्यारीमती सिदार, भानुमति सिदार, शगुन चौहान, सजन मांझी, पद्मेश्वरी मांझी तथा मंगरा के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
राशन दुकान के विक्रेता पदमन चौहान को भी इस प्रकरण में आरोपी बनाया गया है। पुलिस की ओर से दर्ज मामला आरोपों और खाद्य विभाग की शिकायत पर आधारित है। संबंधित लोगों की भूमिका जांच के बाद स्पष्ट होगी।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला
कोतरा रोड पुलिस ने संबंधित आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और 7 के तहत अपराध दर्ज किया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दुकान के स्टॉक में इतनी बड़ी कमी कैसे हुई और खाद्यान्न के भंडारण तथा वितरण में किन परिस्थितियों के कारण अंतर आया।
सरकारी राशन वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल
उचित मूल्य दुकानों के जरिए पात्र हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में ई-पॉस मशीन में दर्ज आंकड़ों और वास्तविक स्टॉक के बीच इतना बड़ा अंतर सामने आने से खाद्यान्न के रखरखाव और वितरण प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल खड़े हुए हैं।हालांकि, खाद्यान्न की कमी के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसमें किसकी क्या भूमिका रही, इसका खुलासा पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।








