इन 9 आरोपियों को कोर्ट ने किया तलब
विशेष अदालत की ओर से जिन आरोपियों को 5 अक्टूबर को पेश होने के लिए कहा गया है, उनमें भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, कारोबारी रामगोपाल अग्रवाल, IAS अधिकारी जयप्रकाश मौर्य और दीपेश टांक समेत 9 लोग शामिल हैं। अदालत में इनकी पेशी सुबह 10:30 बजे निर्धारित बताई गई है।EOW का कहना है कि मामले की जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अभियोग पत्र अदालत में पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
क्या है 570 करोड़ रुपये के कथित कोल लेवी मामले की पूरी कहानी
यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन से जुड़ी कथित अवैध वसूली से संबंधित है। जांच एजेंसियों के अनुसार, ऑनलाइन परमिट व्यवस्था में बदलाव के बाद मैनुअल NOC व्यवस्था के जरिए कोयला परिवहन पर अवैध लेवी वसूले जाने का आरोप है।जांच में प्रति टन कोयले पर रकम वसूलने और इससे रोजाना करोड़ों रुपये की कथित अवैध कमाई होने की बात सामने आई है। अलग-अलग रिपोर्टों में इस मामले में कथित वसूली का आंकड़ा करीब 500 से 570 करोड़ रुपये तक बताया गया है।
जांच में नेताओं और अफसरों तक रकम पहुंचने का दावा
EOW और अन्य जांच एजेंसियों की जांच के मुताबिक, कथित वसूली से हासिल रकम को अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने का आरोप है। एजेंसियों ने चुनावी गतिविधियों, संपत्ति खरीद और अन्य इस्तेमाल से जुड़े दावे भी किए हैं। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत में होने वाली सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
कोडवर्ड से लेकर चुनावी फंडिंग तक, जांच में क्या सामने आया
मामले की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में पैसों के लेनदेन के लिए कथित तौर पर कोडवर्ड का इस्तेमाल किए जाने का भी उल्लेख है। इनमें ‘D नवाज’ नाम के कोड का जिक्र सामने आया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कथित अवैध वसूली से जुड़ी रकम का एक हिस्सा चुनावी गतिविधियों में भी इस्तेमाल किया गया था।
अब आगे क्या होगा
5 अक्टूबर को विशेष अदालत में EOW की ओर से अंतिम आरोप पत्र पेश किए जाने और आरोपियों की उपस्थिति के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चार्जशीट में जांच एजेंसी ने किन आरोपों और साक्ष्यों को शामिल किया है, यह अदालत में दस्तावेज पेश होने के बाद अधिक स्पष्ट होगा। फिलहाल मामले से जुड़े आरोप जांच एजेंसियों के दावों के आधार पर हैं और आरोपियों के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।