झीरम घाटी कांड में 13 साल बाद आया बड़ा फैसला, 10 आरोपी दोषी करार; अब सजा पर 16 सितंबर को होगा फैसला

 जगदलपुर : झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में NIA की विशेष अदालत ने 5 सितंबर को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी, लेकिन ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी।अभियोजन पक्ष ने मामले में 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके साथ ही घटना से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य भी अदालत के सामने रखे गए। अंतिम बहस 10 अगस्त को पूरी होने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

16 सितंबर को तय होगी दोषियों की सजा

अदालत ने दोष सिद्ध होने के बाद अब सजा के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की है। इसी दिन दोषियों को किस अवधि और किस प्रकार की सजा दी जाएगी, इसका फैसला होगा। बताया गया है कि निर्णय की प्रति भी इसी दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराई जाएगी।अंतिम बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित होने की बात रखी थी। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती देते हुए अपने तर्क अदालत के सामने रखे थे।

इन 10 आरोपियों को अदालत ने माना दोषी

अदालत के फैसले में दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति, बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम उर्फ अयाता माड़कम, मुक्का मंडावी, मड़काम देवा, कवासी कोसा, चौतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग और सुमित्रा शामिल हैं।प्रत्येक आरोपी की भूमिका और उनके खिलाफ साबित हुए विशिष्ट आरोपों की विस्तृत स्थिति सजा के आदेश तथा अदालत के विस्तृत निर्णय से और स्पष्ट होगी।

25 मई 2013 को दहल उठा था झीरम घाटी क्षेत्र

झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। सुकमा में कार्यक्रम के बाद लौट रहा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान हथियारबंद माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाया।इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत 31 लोगों की जान गई थी। विद्याचरण शुक्ल हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। कई सुरक्षाकर्मी और कांग्रेस कार्यकर्ता भी हमले में मारे गए थे।

2014 में NIA ने दाखिल की थी पहली चार्जशीट

मामले की जांच NIA को सौंपे जाने के बाद एजेंसी ने 25 सितंबर 2014 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें गिरफ्तार नौ आरोपियों के नाम शामिल थे। बाद में दो और संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई और 28 सितंबर 2015 को NIA ने 35 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की।इनमें से 11 आरोपियों के खिलाफ अदालत में ट्रायल चला। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जबकि चार्जशीट में नामजद 33 आरोपी अब भी फरार बताए जाते हैं।

जांच को लेकर पहले उठ चुके हैं सवाल

झीरम मामले की जांच को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल NIA पर सवाल उठा चुके हैं। उनका आरोप रहा है कि जांच में कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया। बघेल ने यह भी दावा किया था कि दरभा थाने में दर्ज FIR में नामजद लोगों से NIA ने पूछताछ नहीं की।उन्होंने अदालत के निर्देश के बावजूद गुडसा उसेंडी का बयान दर्ज नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया था। हालांकि, अब ट्रायल में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विशेष अदालत ने सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। सजा की अंतिम तस्वीर 16 सितंबर को सामने आएगी।

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