
एमसीबी/ किसी भी परिवार के लिए अपना पक्का घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार होता है। ग्राम देवगढ़, जनपद पंचायत भरतपुर, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के निवासी भइयालाल बैगा के लिए भी यह सपना वर्षों तक अधूरा रहा। आर्थिक तंगी के कारण वे अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में जीवनयापन करने को मजबूर थे। बरसात के दिनों में टपकती छत और जर्जर दीवारें उनके परिवार की सबसे बड़ी चिंता थीं।केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने भइयालाल बैगा के जीवन में नई उम्मीद की किरण जगाई। योजना के अंतर्गत उन्हें पक्के आवास की स्वीकृति मिली, जिसके बाद उनका वर्षों पुराना सपना साकार हो गया। आज उनका परिवार अपने सुरक्षित और पक्के घर में सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा है।भइयालाल बैगा बताते हैं कि पहले हर मौसम में परिवार को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। विशेषकर बारिश के समय घर में पानी भर जाता था और परिवार हमेशा असुरक्षा की भावना में रहता था।
लेकिन अब पक्का मकान बनने से परिवार को सुरक्षित आश्रय मिलने के साथ-साथ आत्मसम्मान और आत्मविश्वास भी मिला है। बच्चों के लिए पढ़ाई का बेहतर वातावरण उपलब्ध हुआ है और पूरे परिवार के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है।उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता दूर कर दी। अब उनके पास अपना स्थायी घर है, जिससे भविष्य को लेकर विश्वास और उम्मीद दोनों बढ़ी हैं।
उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना गरीब और विशेष पिछड़ी जनजातियों के परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना आज विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली का नया अध्याय लिख रही है। भइयालाल बैगा की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचता है, तो केवल घर ही नहीं बनता, बल्कि एक परिवार का भविष्य भी संवर जाता है।







