
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं और श्रीकृष्ण विष्णु के अवतार माने जाते हैं। इसलिए जन्माष्टमी के दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ने से बचना चाहिए। पूजा के लिए तुलसी पहले से तोड़कर रखी जा सकती हैं।
भोजन में रखें सात्विकता
जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने वालों के साथ सामान्य भोजन करने वाले लोगों को भी खानपान में विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल और जौ से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
तामसिक चीजों से बनाएं दूरी
जन्माष्टमी को भगवान कृष्ण की भक्ति और सात्विकता से जुड़ा दिन माना जाता है। ऐसे में घर में मांस, शराब, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक पदार्थ लाने या उनका सेवन करने से बचना चाहिए।
किसी का अपमान न करें
भगवान कृष्ण की पूजा केवल विधि-विधान तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि व्यवहार की शुद्धता को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। इसलिए जन्माष्टमी के दिन गरीब, जरूरतमंद या किसी भी व्यक्ति का अपमान करने से बचें और सभी के प्रति सम्मान का भाव रखें।
पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने से बचें
धार्मिक मान्यताओं में जन्माष्टमी के दिन पेड़ काटना शुभ नहीं माना जाता। इस दिन प्रकृति के प्रति सम्मान दिखाने के लिए पेड़-पौधों की देखभाल करना या पौधा लगाना बेहतर माना जाता है।
मन और व्यवहार में रखें संयम
जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की आराधना करते समय तन और मन की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने की मान्यता है। इसलिए दिनभर संयमित आचरण रखें और पूजा-पाठ के दौरान मन को नकारात्मक विचारों से दूर रखने का प्रयास करें।
गायों के प्रति रखें सम्मान
भगवान कृष्ण का बचपन गोपाल के रूप में गायों के बीच बीता था। इसी कारण सनातन परंपरा में गायों को कृष्ण से जोड़कर देखा जाता है। जन्माष्टमी के दिन गायों के प्रति किसी तरह का अपमानजनक व्यवहार न करने और संभव हो तो उनकी सेवा करने की परंपरा बताई जाती है।







