अपनी ही जमीन के लिए 5 साल से भटक रहा परिवार, 14 एकड़ पुश्तैनी भूमि पर कब्जे को लेकर प्रशासन से लगाई गुहार

सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में भूमि विवादों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामला बतौली तहसील क्षेत्र का है, जहां एक परिवार अपनी ही पुश्तैनी जमीन पर अधिकार पाने के लिए वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं मिलने के बाद पीड़ित परिवार ने अब कलेक्टर से न्याय की मांग की है।

14 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक को लेकर खड़ा हुआ विवाद

मामला बतौली तहसील अंतर्गत ग्राम वीरिमकेला पंचायत के पटवारी हल्का क्रमांक 21 से जुड़ा है। पीड़िता जानकी बाई पिता मंगता के नाम दर्ज करीब 14 एकड़ भूमि ग्राम पंचायत मंगारी की सीमा से लगी हुई है। परिवार का कहना है कि उनके पूर्वज तीन पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती करते आए हैं। हालांकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कुछ समय के लिए खेती बंद करनी पड़ी, जिसके बाद अब जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

ग्रामीण बता रहे शासकीय और कब्रिस्तान की जमीन

पीड़ित परिवार का आरोप है कि ग्राम पंचायत मंगारी के कुछ ग्रामीण इस निजी पट्टे की भूमि को शासकीय और कब्रिस्तान की जमीन बताकर कब्जा लेने से रोक रहे हैं। परिवार का कहना है कि विरोध करने वाले लोग अब तक अपने दावों के समर्थन में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं, फिर भी मामला लंबे समय से अटका हुआ है।

बीमार महिला न्याय के लिए खा रही दफ्तरों की ठोकरें

जानकी बाई शारीरिक रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद अपनी जमीन वापस पाने के लिए लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं। थाने से लेकर तहसील कार्यालय तक कई बार गुहार लगाने के बाद भी उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है। परिवार का कहना है कि हर बार केवल आश्वासन मिलता है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा।

राजस्व विभाग में पांच साल से लंबित है मामला

पीड़िता और उनके पति बृजलाल तिर्की के अनुसार यह विवाद पिछले पांच वर्षों से राजस्व विभाग में लंबित है। फाइलें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक घूमती रहीं, लेकिन जमीन पर वास्तविक कब्जा दिलाने की दिशा में कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते परिवार अपनी ही जमीन पर खेती नहीं कर पा रहा, जिससे आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।

कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

स्थानीय प्रशासन और तहसील स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से निराश परिवार ने अब कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर न्याय की मांग की है। परिवार को उम्मीद है कि उच्च प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप होने से वर्षों पुराना विवाद सुलझ सकेगा।

एसडीएम ने दिया कार्रवाई का भरोसा

सीतापुर एसडीएम फगेश सिन्हा ने कहा है कि मामले की पूरी जानकारी ली जाएगी। संबंधित भूमि का पुनरीक्षण कर आवश्यक जांच की जाएगी और यदि दस्तावेजों के आधार पर भूमि पीड़िता की पाई जाती है तो नियमानुसार कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

जमीन का विवाद बना आजीविका पर संकट

यह मामला केवल भूमि स्वामित्व का नहीं, बल्कि एक परिवार की आजीविका और अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। पांच वर्षों से लंबित यह विवाद अब प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। परिवार की निगाहें अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन पर अधिकार मिल सके।

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