
लेखिका: नम्रता सिंह, निदेशक, उर्मिला फाउंडेशन, रायपुर
यह लेखिका की व्यक्तिगत राय है।
दीपावली केवल दीप जलाने, घर सजाने और मां लक्ष्मी की आराधना करने का पर्व नहीं है। यह प्रेम, सद्भाव, खुशहाली और सकारात्मक बदलाव का संदेश भी देता है। इस अवसर पर हर परिवार सुख-समृद्धि की कामना करता है, लेकिन सच्ची समृद्धि तभी संभव है, जब घर की महिलाओं को सम्मान, समानता और अपने सपनों को पूरा करने की स्वतंत्रता मिले। मेरे विचार में नारी का सम्मान ही लक्ष्मी पूजा का वास्तविक अर्थ है।
परिवार की खुशहाली में नारी की अहम भूमिका
एक महिला परिवार को जोड़ने और उसे संबल देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मां के रूप में वह बच्चों को संस्कार देती है, बेटी बनकर परिवार की उम्मीदों को आगे बढ़ाती है, बहन के रूप में स्नेह बांटती है और जीवनसाथी के तौर पर सुख-दुख में साथ निभाती है। परिवार की खुशियों से लेकर कठिन समय की जिम्मेदारियों तक, उसका योगदान अनेक रूपों में दिखाई देता है।
इसके बावजूद कई बार महिलाओं के परिश्रम, त्याग और भावनाओं को वह महत्व नहीं मिल पाता, जिसकी वे हकदार हैं। उनकी जिम्मेदारियों को सहज मान लिया जाता है, जबकि उनके सपनों और इच्छाओं को पीछे छोड़ दिया जाता है। यह सोच बदलना जरूरी है।
घर की सजावट के साथ सोच में भी आए बदलाव
दीपावली पर हम अपने घरों की सफाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं और दीपों से वातावरण को रोशन करते हैं। लेकिन क्या हमने अपने विचारों और व्यवहार को भी बेहतर बनाने का प्रयास किया है? यह सवाल हर परिवार और समाज को स्वयं से पूछना चाहिए।
बेटियों को कमतर समझना, महिलाओं के निर्णयों को महत्व न देना और उनके सपनों को सीमित करना ऐसी प्रवृत्तियां हैं, जिन्हें बदलने की आवश्यकता है। बेटियों को शिक्षा, रोजगार और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए। महिलाओं की प्रतिभा को पहचानना और उनके फैसलों का सम्मान करना केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक बेहतर समाज के निर्माण की बुनियाद है।
नारी सम्मान केवल एक दिन का संकल्प नहीं
महिलाओं के प्रति सम्मान किसी त्योहार या विशेष अवसर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह हमारे रोजमर्रा के व्यवहार और पारिवारिक संस्कारों का हिस्सा बनना चाहिए। घर में महिला को सुरक्षा और सम्मान के साथ अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर मिले। वह अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ सके, आत्मनिर्भर बन सके और बिना किसी अनावश्यक दबाव के अपने सपनों को पूरा कर सके।
महिलाओं की बात सुनना, उनकी भावनाओं को समझना और उनके योगदान को स्वीकार करना छोटे कदम लग सकते हैं, लेकिन इनका असर परिवार के माहौल पर गहरा पड़ता है। जिस घर में हर सदस्य को सम्मान और अपनी बात रखने का अवसर मिलता है, वहां रिश्तों में विश्वास और आपसी समझ मजबूत होती है।
समान अवसरों से मजबूत होगा समाज
किसी भी समाज की प्रगति केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं मापी जा सकती। यह भी जरूरी है कि वहां महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और आगे बढ़ने के अवसर मिलें। बेटी को शिक्षा देना, महिला को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना और उसके आत्मसम्मान की रक्षा करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
इस बदलाव की शुरुआत किसी बड़े अभियान से ही हो, यह जरूरी नहीं। इसकी शुरुआत अपने घर से की जा सकती है। बेटियों और बेटों के साथ समान व्यवहार करना, घरेलू जिम्मेदारियों में सहयोग देना और महिलाओं के विचारों को महत्व देना सकारात्मक बदलाव की दिशा में सार्थक कदम हैं।
इस दीपावली जलाएं सम्मान और समानता के दीप
इस दीपावली हम घरों को रोशन करने के साथ अपने व्यवहार में भी संवेदनशीलता का उजाला लाने का संकल्प लें। महिलाओं को सम्मान देना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें अपनी पहचान बनाने के अवसर देना ही खुशहाल परिवार और समावेशी समाज की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता है।
सच्ची समृद्धि केवल धन-दौलत और भौतिक सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, समानता और सम्मान से भरे रिश्तों में बसती है। जब घर की महिला खुश होगी, सुरक्षित महसूस करेगी और उसे अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिलेगा, तभी परिवार की खुशियां वास्तविक अर्थों में बढ़ेंगी।
घर की लक्ष्मी मुस्कुराएगी, तभी दीपावली सच में जगमगाएगी।








