14 लाख रुपये में लगी प्रतिमा पर उठे बड़े सवाल, बारिश के बाद खुली ऐसी परत कि मच गया राजनीतिक और प्रशासनिक हंगामा

 छत्तीसगढ़ :  कोरबा जिले के कटघोरा स्थित अटल परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगाया जा रहा है कि जिस प्रतिमा को तांबे की बताकर स्थापित किया गया था, वह वास्तव में सीमेंट से तैयार की गई है और उसे तांबे जैसा स्वरूप देने के लिए केवल रंग का इस्तेमाल किया गया। हाल की बारिश के बाद प्रतिमा की बाहरी सतह उखड़ने लगी, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।

बारिश के बाद सामने आया नया विवाद

स्थानीय लोगों का दावा है कि बारिश के कारण प्रतिमा की ऊपरी परत कई जगह से निकलने लगी। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि प्रतिमा में तांबे का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि उसे सीमेंट से बनाकर तांबे जैसा रंग दिया गया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

14 लाख रुपये की लागत पर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार प्रतिमा की स्थापना पर करीब 14 लाख रुपये खर्च किए गए थे। अब आरोप सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और खर्च की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।

नगर पालिका अध्यक्ष भी विवाद के केंद्र में

इस मामले में कटघोरा नगर पालिका अध्यक्ष राज जायसवाल का नाम भी चर्चा में है। विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने प्रतिमा निर्माण में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पुराने मामलों से भी जुड़ रही चर्चा

प्रतिमा विवाद के बाद एक बार फिर जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कथित अनियमितताओं के पुराने मामले की भी चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिससे मामला और अधिक चर्चा का विषय बन गया है।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने उठाई जांच की मांग

भाजपा जिलाध्यक्ष ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जुड़े किसी भी स्मारक या प्रतिमा के निर्माण में यदि लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल पूरे मामले को लेकर आरोप और प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है।

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