
रायपुर: कांकेर जिले में तीन आदिवासी बच्चों की मलेरिया से मौत की पुष्टि के बाद प्रदेश में मलेरिया की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य मलेरिया से होने वाली मौतों को पूरी तरह रोकना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार गांव-गांव पहुंचकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। उन्होंने निजी चिकित्सकों से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।
सरकार ने गिनाए पिछले वर्षों के आंकड़े
उजाला समय से चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2020 में प्रदेश में मलेरिया से 34 लोगों की मौत हुई थी, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 12 रह गई। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य मलेरिया से एक भी व्यक्ति की मौत नहीं होने देना है। इसी लक्ष्य को लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन और मैदानी अमला लगातार गांवों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं।

जरा सी लापरवाही भी पड़ सकती है भारी
भाठागांव स्थित उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल के गंभीर पेट रोग विशेषज्ञ एवं लेप्रोस्कोपी सर्जन डॉ. विनोद ने लोगों से मलेरिया को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मलेरिया के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने सलाह दी कि बुखार, ठंड लगना, शरीर में दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में जाकर चिकित्सकीय परामर्श लें।
घर घर पहुंचकर किया जा रहा जागरूक
डॉ. विनोद ने बताया कि उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल केंद्र और राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार निशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर रहा है। अस्पताल की ओर से एंडोस्कोपी जैसी महंगी जांच भी निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ग्रामीण क्षेत्रों के साथ भाठागांव में भी घर घर पंपलेट वितरित कर लोगों को मलेरिया से बचाव के उपायों की जानकारी दे रहा है, ताकि समय रहते लोग सतर्क रहें और बीमारी से खुद तथा अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें।







