
बालोद : नाबालिग बच्ची की अभिरक्षा से जुड़े मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए SDM बालोद द्वारा पारित विवादित आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नाबालिग की अभिरक्षा, उसके भविष्य और सर्वोत्तम हित से जुड़े मामलों का निर्णय SDM नहीं, बल्कि विधि के अनुसार सक्षम जिला या कुटुम्ब न्यायालय ही कर सकता है।
अभिरक्षा मामलों में सीमित अधिकार, संक्षिप्त सुनवाई पर्याप्त नहीं
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि किसी नाबालिग के संरक्षण और अभिरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर संक्षिप्त सुनवाई के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। ऐसे मामलों में विस्तृत विचार और विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
गिरफ्तारी और तलाशी वारंट वाला आदेश हुआ रद्द
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने SDM बालोद द्वारा पिता की गिरफ्तारी और बच्ची की तलाशी वारंट से संबंधित पारित आदेश को वैधानिक अधिकार क्षेत्र से परे मानते हुए निरस्त कर दिया। साथ ही, इस पूरे मामले में पारित विवादित आदेश की जांच कराने के लिए कलेक्टर को निर्देश दिया गया है। न्यायालय ने 15 दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है।
अधिवक्ता ने उठाए अधिकार क्षेत्र पर सवाल
प्रकरण में मालेकर परिवार की ओर से अधिवक्ता भेष कुमार साहू ने पक्ष रखते हुए SDM के अधिकार क्षेत्र और आदेश की वैधानिकता पर विस्तृत कानूनी तर्क प्रस्तुत किए। न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों और प्रस्तुत दलीलों पर विचार करने के बाद SDM का आदेश निरस्त करने का निर्णय सुनाया।
न्यायालय का स्पष्ट संदेश
अदालत ने अपने आदेश के माध्यम से यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे की अभिरक्षा माता-पिता के बीच विवाद का साधारण विषय नहीं है। यह उसके भविष्य, सुरक्षा और सर्वोत्तम हित से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। इसलिए ऐसे मामलों का निपटारा केवल विधि द्वारा निर्धारित सक्षम जिला या कुटुम्ब न्यायालय के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।







