महंगी गैस खरीदना कंपनी की मजबूरी बना
MGL के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत तेजी से बढ़ी है। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति ने वैश्विक गैस बाजार पर दबाव बनाया है, जिससे कंपनी की खरीद लागत बढ़ गई है।CNG की बढ़ती मांग के बीच उपलब्ध घरेलू गैस पर्याप्त नहीं होने के कारण कंपनी को अंतरराष्ट्रीय बाजार से स्पॉट RLNG खरीदनी पड़ रही है। यह गैस अपेक्षाकृत महंगी पड़ रही है। कंपनी का कहना है कि उपभोक्ताओं पर डाला गया अतिरिक्त भार पूरी लागत वसूली नहीं, बल्कि बढ़ती इनपुट लागत की आंशिक भरपाई के लिए किया गया है।
लाखों वाहन चालक और घरेलू उपभोक्ता आएंगे दायरे में
इस मूल्य वृद्धि का असर केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा। महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई इलाकों में MGL की सेवाएं लेने वाले उपभोक्ताओं को भी इसका सामना करना पड़ेगा।CNG की नई कीमतों से मुंबई, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, लातूर और धाराशिव के साथ कर्नाटक के चित्रदुर्ग और दावणगेरे में करीब 13 लाख वाहन चालक प्रभावित होने की संभावना है।वहीं, PNG की दर बढ़ने से कंपनी के नेटवर्क से जुड़े लगभग 30 लाख घरेलू उपभोक्ताओं के रसोई बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
दिल्ली-एनसीआर के बाद मुंबई में भी बढ़ा ईंधन का बोझ
मुंबई में यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले दिल्ली-एनसीआर में भी CNG की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने वहां CNG के दाम 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाकर 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिए थे।अब देश के दो बड़े शहरी बाजारों में CNG की कीमत बढ़ने से वाहन चालकों की चिंता बढ़ गई है।
गैस की कीमत क्यों बढ़ी, समझें बड़ी वजह
CNG और PNG की दरों में वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां जिम्मेदार बताई जा रही हैं।पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय गैस बाजार में कीमतों पर दबाव बना है। इसके अलावा मुंबई क्षेत्र में CNG की मांग लगातार अधिक बनी हुई है। घरेलू स्तर पर मिलने वाली गैस की उपलब्धता मांग के अनुरूप नहीं होने के कारण कंपनी को महंगी आयातित RLNG पर निर्भर रहना पड़ रहा है।यही बढ़ी हुई खरीद लागत अब CNG और PNG की कीमतों में दिखाई दे रही है।
ऑटो और टैक्सी चालकों ने जताया विरोध
CNG महंगी होने के बाद ऑटो और टैक्सी चालकों में नाराजगी देखी जा रही है। रिक्शामेन यूनियन और अन्य वाहन संगठनों ने कीमत वृद्धि पर विरोध दर्ज कराया है।चालकों का कहना है कि हाल ही में किराए में संशोधन लागू किया गया था, लेकिन ईंधन की कीमत बढ़ने से उनकी आय और खर्च का गणित फिर बिगड़ सकता है। उनका मानना है कि लगातार बढ़ती परिचालन लागत का सीधा असर वाहन चालकों की कमाई पर पड़ता है।
मुंबई के परिवहन तंत्र पर भी पड़ सकता है असर
मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में वाहन CNG पर निर्भर हैं। इनमें करीब 4.7 लाख ऑटो रिक्शा, लगभग 1.6 लाख काली-पीली टैक्सियां और 5 लाख से अधिक निजी कारें शामिल हैं। सार्वजनिक परिवहन से जुड़े कई वाहन और बसें भी CNG का इस्तेमाल करती हैं।BEST और TMT जैसी परिवहन सेवाओं पर बढ़ी हुई गैस लागत का असर पड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
रसोई बजट पर भी बढ़ेगा अतिरिक्त दबाव
PNG की कीमत में 1 रुपये प्रति SCM की वृद्धि मुंबई महानगर क्षेत्र के लाखों परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित करेगी। MMR क्षेत्र में करीब 31 लाख परिवार PNG नेटवर्क से जुड़े बताए जाते हैं।हालांकि प्रति SCM बढ़ोतरी मामूली लग सकती है, लेकिन मासिक खपत के आधार पर यह घरेलू खर्च में अतिरिक्त राशि जोड़ सकती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय गैस बाजार की आगे की चाल तय करेगी कि उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में और राहत मिलेगी या कीमतों का दबाव बना रहेगा।