छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में महिलाओं को राहत, 7 प्रकरणों का निराकरण

 

रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने महिलाओं की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और विवादों के समाधान की दिशा में जनसुनवाई आयोजित की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में संभाग प्रभारी सदस्य श्रीमती सरला कोशरिया और सदस्य ओजस्वी मंडावी ने विभिन्न मामलों की सुनवाई की। रायपुर जिले में दर्ज 50 प्रकरणों में से अब तक 28 मामलों की सुनवाई पूरी की गई, जिनमें 7 प्रकरण नस्तीबद्ध किए गए।

जनसुनवाई के दौरान वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा, भरण-पोषण, संपत्ति में अधिकार, बच्चों की पढ़ाई, दिव्यांग महिला की लिफ्ट संबंधी शिकायत और महिला के साथ कथित यौन शोषण जैसे गंभीर विषय सामने आए। आयोग ने मामलों की प्रकृति के अनुसार संबंधित पक्षों को निर्देश दिए और कई प्रकरणों को आगे की सुनवाई के लिए निर्धारित किया।

वैवाहिक विवाद में स्त्रीधन वापसी और पांच लाख रुपये देने पर सहमति

एक प्रकरण में दोनों पक्ष जनसुनवाई में उपस्थित हुए। सखी वन स्टॉप सेंटर की पीओ और काउंसलर ने दोनों की काउंसलिंग की। महिला ने स्पष्ट किया कि वह अनावेदक के साथ आगे नहीं रहना चाहती और अपना स्त्रीधन वापस चाहती है। आयोग ने उसे कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र बताया।

वहीं, अनावेदक ने महिला को एकमुश्त पांच लाख रुपये देने पर सहमति जताई, जिसे 4 नवंबर को देने की बात कही गई। इसके अलावा 31 अक्टूबर को महिला पुलिसकर्मी और सखी वन स्टॉप सेंटर के प्रतिनिधि की मौजूदगी में महिला को ससुराल में रखा अपना सामान वापस लेने जाने की व्यवस्था तय की गई। मामले को आगे की सुनवाई के लिए रखा गया।

महिला को संपत्ति में अधिकार देने के निर्देश

एक अन्य मामले में आवेदिका ने संपत्ति में अपना हिस्सा दिलाने की मांग की। पूर्व निर्णय के अनुसार ग्राम बिरकोनी में दो एकड़ कृषि भूमि और छेरीखेड़ी में एक मकान दर्ज था। आयोग ने दोनों संपत्तियों की रजिस्ट्री एक माह के भीतर महिला के नाम कराने के निर्देश दिए। इस मामले में आगे की सुनवाई भी निर्धारित की गई।

बच्चों की टीसी दिलाने के निर्देश

एक मामले में महिला की ओर से अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि समाज के अध्यक्ष द्वारा उसे परेशान किया जा रहा है और उसके चरित्र को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं। सुनवाई में सामने आया कि महिला ने न्यायालय में भरण-पोषण और घरेलू हिंसा से संबंधित मामले भी दर्ज किए हैं।

महिला ने बताया कि बच्चों के पूर्व विद्यालय से स्थानांतरण प्रमाणपत्र यानी टीसी प्राप्त करने में अनावेदक सहयोग नहीं कर रहा है। बच्चों से उनकी इच्छा पूछे जाने पर उन्होंने मां के साथ रहने की बात कही। आयोग ने अनावेदक को बच्चों की टीसी निकलवाकर महिला को सौंपने के निर्देश दिए। प्रकरण आगामी सुनवाई के लिए रखा गया।

घरेलू हिंसा की शिकायत पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश

एक महिला ने बताया कि पति की मारपीट और शराब की लत के कारण उसके साथ रहना संभव नहीं है। वर्तमान में वह रायपुर स्थित मायके में रह रही है और पति से भरण-पोषण तथा तलाक चाहती है। आयोग ने महिला को विधिक सहायता के माध्यम से अधिवक्ता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया गया।

दिव्यांग महिला की लिफ्ट की समस्या पर कार्रवाई

एक दिव्यांग महिला ने लिफ्ट की खरीदी और समय पर सर्विसिंग नहीं होने से जुड़ी शिकायत रखी। महिला के अनुसार लिफ्ट में कई तकनीकी समस्याएं आने के कारण उसे रोजमर्रा के कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अनावेदक ने लिफ्ट के रखरखाव में लापरवाही की बात स्वीकार की और मरम्मत के लिए नवंबर माह तक का समय मांगा। आयोग ने मामले को अगली सुनवाई के लिए निर्धारित किया।

विवाहित व्यक्ति को महिला से संपर्क नहीं रखने की हिदायत

एक अन्य प्रकरण में दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने विवाहित अनावेदक को आवेदिका से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं रखने और फोन नहीं करने की हिदायत दी। आवेदिका को भी उससे संपर्क नहीं रखने के लिए कहा गया। साथ ही स्पष्ट किया गया कि यदि अनावेदक महिला को परेशान करता है तो वह उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकती है। महिला ने किसी प्रकार की आर्थिक सहायता लेने से इनकार किया। इसके बाद मामला नस्तीबद्ध कर दिया गया।

विवादित मकान के दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश

एक संपत्ति विवाद में आयोग ने अनावेदक को रजिस्ट्री की तारीख से संबंधित दस्तावेज और विवादित मकान के टैक्स की सभी रसीदें प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। दस्तावेजों की जांच और आगे की कार्रवाई के लिए मामले को अगली सुनवाई तक लंबित रखा गया।

साथ रहने पर सहमति, पांच हजार रुपये मासिक खर्च देने का निर्देश

एक वैवाहिक विवाद में दोनों पक्षों ने साथ रहने की सहमति जताई। आयोग ने अनावेदक को निर्देश दिया कि वह महिला के साथ मारपीट और गाली-गलौज नहीं करेगा तथा घरेलू खर्च के लिए हर महीने पांच हजार रुपये देगा। दोनों के बीच हुए समझौते के पालन की निगरानी के लिए प्रकरण रखा गया।

12 साल तक शादी का झांसा देकर शोषण करने के आरोप में एफआईआर

एक गंभीर शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि अनावेदक ने करीब 12 वर्षों तक शादी का झांसा देकर उसका दैहिक शोषण किया, उसके चरित्र को लेकर आरोप लगाए और बाद में शादी करने से इनकार कर दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग की न्यायपीठ ने थाना प्रभारी, टिकरापारा, रायपुर को जांच कर कार्रवाई की जानकारी देने के निर्देश दिए थे। आयोग के अनुसार, इन निर्देशों के पालन में पुलिस ने अनावेदक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64(2)(m) और पॉक्सो अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की है।

तीन मामलों में अनुपस्थित पक्षों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश

तीन अन्य प्रकरणों में आवेदिकाएं सुनवाई के लिए उपस्थित हुईं, जबकि अनावेदक अनुपस्थित रहे। आयोग ने आगामी सुनवाई में संबंधित थाना प्रभारियों के माध्यम से अनावेदकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

जनसुनवाई में अधिकारी और काउंसलर रहे मौजूद

सुनवाई के दौरान रायपुर संभाग प्रभारी श्रीमती मंजू थदानी, महिला थाना प्रभारी मौर्य, डीएसपी स्नेहा आकाश राव, वन स्टॉप सेंटर की काउंसलर नीति सिंह, प्रोटेक्शन ऑफिसर प्रीति पाण्डेय सहित आयोग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

आयोग की इस जनसुनवाई में महिलाओं की शिकायतों के समाधान, कानूनी सहायता, पारिवारिक विवादों में सहमति और गंभीर आरोपों पर पुलिस कार्रवाई जैसे विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया गया।

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