
रायपुर। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने छत्तीसगढ़ दौरे की शुरुआत करते ही भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की सरकार स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही, बल्कि उसके फैसले दिल्ली से तय किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि प्रदेश में आदिवासी समाज के अधिकारों की अनदेखी हो रही है और सरकार बड़े उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।
संजय सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री आदिवासी समाज से आते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण फैसलों पर उनका नियंत्रण नजर नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में जमीन और संसाधनों से जुड़े मामलों में आम लोगों की बजाय प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र और भाजपा सरकारों पर साधा निशाना
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सांसद ने कहा कि देशभर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2015 के बाद से अनेक परीक्षाएं विवादों में रही हैं और इनमें भाजपा शासित राज्यों का नाम भी सामने आया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी भर्ती परीक्षा से जुड़ा मामला सामने आया था। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियां युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री को भी इसी तरह के विवादों के कारण पद छोड़ना पड़ा था।
UPSC परीक्षा का उल्लेख करते हुए संजय सिंह ने कहा कि कुछ अभ्यर्थियों ने प्रश्नों और उत्तरों में त्रुटियों का मुद्दा उठाया है। उनका कहना था कि इस मामले में कई छात्र न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुके हैं।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर उठाए सवाल
महिला आरक्षण कानून को लेकर उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देना चाहती है तो इसका लाभ तत्काल मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी विधानसभाओं और लोकसभा सीटों पर बिना देरी के महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए।
उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कई राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की बात कही जा रही है, लेकिन इसका आधार और प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर सीटों की संख्या बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
यूसीसी पर दो निगरानी समितियां बनाने की मांग
समान नागरिक संहिता को लेकर भी संजय सिंह ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समानता की बात करती है तो समाज के विभिन्न वर्गों के साथ होने वाले भेदभाव पर भी समान गंभीरता से काम करना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि एक समिति अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ होने वाले भेदभाव की निगरानी करे, जबकि दूसरी समिति सभी समुदायों के साथ होने वाले अन्य प्रकार के भेदभाव पर नजर रखे। उनका आरोप था कि मौजूदा सरकार ऐसे मुद्दों के समाधान की बजाय समाज में टकराव की राजनीति को बढ़ावा दे रही है।






