Chhattisgarh Vision 2047: आज के फैसलों से कैसे तैयार हो रहा 2047 का छत्तीसगढ़, GYAN मॉडल में छिपी है विकास की बड़ी तस्वीर

रायपुर। छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार की विकास रणनीति केवल सड़क, भवन, उद्योग और दूसरी आधारभूत सुविधाओं तक सीमित नहीं दिखाई देती। दीर्घकालिक योजना में शिक्षा, कौशल, रोजगार, शोध और मानव संसाधन को विकास की केंद्रीय ताकत बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी सोच को अंजोर विजन 2047 के माध्यम से आगे बढ़ाने की बात कही जा रही है।

इस दृष्टिकोण में GYAN मॉडल को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। GYAN में G यानी गरीब, Y यानी युवा, A यानी अन्नदाता और N यानी नारी को विकास की प्राथमिक धुरी के रूप में रखा गया है। सोच यह है कि इन चार वर्गों को मजबूत किए बिना विकास का लाभ समाज के हर हिस्से तक नहीं पहुंचाया जा सकता।

विकास की असली ताकत को लेकर बदली सोच

राज्य सरकार की इस विकास अवधारणा में मानव संसाधन को सबसे महत्वपूर्ण पूंजी माना गया है। गरीब परिवारों को बेहतर अवसर, युवाओं को शिक्षा और रोजगार, किसानों को आय तथा सम्मान और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासों को व्यापक विकास से जोड़ा जा रहा है।

इस मॉडल में युवा शक्ति को भविष्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार माना गया है। तकनीक, उद्योग, शिक्षा, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में दक्ष युवा आने वाले वर्षों में राज्य की आर्थिक क्षमता को नई दिशा दे सकते हैं।

युवाओं के लिए शिक्षा से आगे कौशल और अवसरों पर फोकस

विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना में उच्च शिक्षा को अहम स्थान दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के जरिए उच्च शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित रखने के बजाय उसे गुणवत्तापूर्ण, व्यावसायिक और रोजगार केंद्रित बनाने की दिशा में काम किए जाने की बात कही गई है।

इसी क्रम में सकल नामांकन अनुपात यानी GER में भी सुधार का दावा किया गया है। वर्ष 2021-22 में प्रदेश का GER 19.6 प्रतिशत था, जो अब 27.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2035 तक इसे 50 प्रतिशत करने का है।

GER में यह वृद्धि सिर्फ आंकड़ा नहीं है। इसका सीधा संबंध उन युवाओं से है, जिन्हें उच्च शिक्षा तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है। ज्यादा युवा उच्च शिक्षा से जुड़ेंगे तो कौशल, ज्ञान और रोजगार की संभावनाओं का दायरा भी बढ़ेगा।

हर जिले तक पहुंचाने की तैयारी, छोटे शहरों के छात्रों को मिलेगा फायदा

उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखने की योजना पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के हर जिले में सुविधाओं से लैस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस महाविद्यालय विकसित करने की दिशा में काम किए जाने की जानकारी दी गई है।

इस पहल का उद्देश्य क्षेत्रीय असमानता को कम करना भी है। यदि विद्यार्थियों को अपने जिले में ही बेहतर शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध होंगी तो उन्हें पढ़ाई के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम हो सकती है।

बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए इसका महत्व और अधिक हो सकता है। स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा उपलब्ध होने से प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने के लिए अपने क्षेत्र से बाहर जाने की मजबूरी कम करने में मदद मिल सकती है।

अब डिग्री के साथ शोध और इनोवेशन पर भी जोर

विकसित राज्य की अर्थव्यवस्था केवल शिक्षित युवाओं से नहीं बनती, बल्कि ऐसे मानव संसाधन से बनती है जो नई समस्याओं के समाधान खोज सके। इसी उद्देश्य से राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना की परिकल्पना की गई है।

शोध को बढ़ावा मिलने से कृषि, खनन, वन, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यावरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्थानीय अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ की जरूरतों के अनुरूप नए समाधान विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय पारंपरिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इससे शिक्षा को स्थानीय जरूरतों और ज्ञान परंपराओं से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

NAAC मूल्यांकन से तय होगी उच्च शिक्षा की अगली गुणवत्ता

उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ संस्थानों की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में NAAC मूल्यांकन को महत्वपूर्ण माना गया है।

प्रदेश के 343 शासकीय महाविद्यालयों में से NAAC मूल्यांकन के लिए पात्र 254 संस्थानों में 200 का मूल्यांकन पूरा होने की जानकारी दी गई है। वहीं नौ विश्वविद्यालयों में से पांच विश्वविद्यालयों का NAAC मूल्यांकन हो चुका है।

मूल्यांकन की यह प्रक्रिया संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता, जवाबदेही और निर्धारित मानकों के पालन को मजबूत करने में मदद कर सकती है। इसका अंतिम लाभ विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाओं के रूप में मिल सकता है।

नए कॉलेज और विश्वविद्यालय बढ़ने से शिक्षा का दायरा होगा व्यापक

वर्ष 2025-26 में प्रदेश में आठ नए शासकीय महाविद्यालय, पांच नए निजी महाविद्यालय और तीन नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई है।

हालांकि केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त शिक्षक और अन्य शैक्षणिक संसाधन भी जरूरी हैं। इसी दिशा में प्राध्यापकों के 595 पदों के अलावा सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ाधिकारी के 700 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है।

इस तरह उच्च शिक्षा के ढांचे के विस्तार के साथ उसे संचालित करने वाले मानव संसाधन को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

GYAN मॉडल में चार वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश

GYAN मॉडल का दायरा केवल युवाओं तक सीमित नहीं है। इसमें गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी को विकास की समान प्रक्रिया से जोड़ने की अवधारणा रखी गई है।

गरीब परिवारों को अवसर और स्थायित्व, किसानों को बेहतर उत्पादकता और आय, महिलाओं को आत्मनिर्भरता तथा युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार मिलने पर विकास अधिक व्यापक हो सकता है।

यही वजह है कि GYAN को केवल एक संक्षिप्त नाम के रूप में नहीं बल्कि समावेशी विकास की अवधारणा के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

2047 की मंजिल के लिए आज की शिक्षा और युवा शक्ति को बनाया आधार

अंजोर विजन 2047 के पीछे मूल विचार यह है कि वर्ष 2047 का विकसित छत्तीसगढ़ अचानक तैयार नहीं होगा। उसकी नींव वर्तमान में लिए जा रहे फैसलों से बनेगी।

आज के स्कूल, कॉलेज, कौशल केंद्र, शोध संस्थान और प्रशिक्षित युवा ही आने वाले समय में राज्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास को आकार देंगे। प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत के साथ यदि राज्य अपनी युवा आबादी को आधुनिक ज्ञान और कौशल से जोड़ने में सफल होता है तो विकास की संभावनाएं और व्यापक हो सकती हैं।

अंजोर की सोच में ज्ञान से अवसर और अवसर से विकास का रास्ता

छत्तीसगढ़ी संस्कृति में अंजोर का अर्थ प्रकाश से जुड़ा है। इसी प्रतीक को ज्ञान और विकास से जोड़ते हुए विजन 2047 की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस सोच का केंद्र स्पष्ट है। गरीब तक अवसर पहुंचे, युवा ज्ञान और कौशल से मजबूत बने, अन्नदाता को बेहतर आय और सम्मान मिले तथा महिलाएं आत्मनिर्भर बनें। इन चारों क्षेत्रों में मजबूती आने पर विकास का असर समाज के अधिक व्यापक हिस्से तक पहुंच सकता है।

वर्ष 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से मजबूत छत्तीसगढ़ बनाना नहीं है, बल्कि ऐसा राज्य तैयार करना है जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कुशल युवा, समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर महिलाएं और सम्मान के साथ विकास की मुख्यधारा में शामिल गरीब परिवार इसकी पहचान बनें।

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