छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम: प्रस्ताव पर गरमाई बहस, विपक्ष का जोरदार हंगामा

 रायपुर :  छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया, जिस पर आसंदी ने चार घंटे की चर्चा का समय निर्धारित किया।

नेता प्रतिपक्ष का प्रस्ताव खारिज, बढ़ा सियासी तापमान
मुख्यमंत्री के प्रस्ताव के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने अशासकीय संकल्प पेश करने की कोशिश की, जिसे आसंदी ने स्वीकार नहीं किया। इस पर महंत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा लाया गया प्रस्ताव निंदा से जुड़ा नहीं है, जबकि पहले इसकी बात कही गई थी।

सदन में हंगामा, महिलाओं को गुमराह करने का आरोप
प्रस्ताव को लेकर विपक्ष ने जमकर विरोध किया और आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष महिलाओं को लेकर भ्रामक प्रचार कर रहा है। इस मुद्दे पर सदन का माहौल काफी गरम रहा और कई बार व्यवधान की स्थिति बनी।

महिला आरक्षण पर आरोप-प्रत्यारोप, इतिहास तक पहुंची बहस
चर्चा के दौरान विधायक लता उसेंडी ने विपक्ष पर महिला आरक्षण में बाधा डालने का आरोप लगाया और कहा कि लोकसभा में भी इस बिल को गिराने का प्रयास विपक्ष ने किया था।

वहीं कांग्रेस की ओर से अनिला भेड़िया ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसे 2029 तक टालना उचित नहीं है और इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने अपने वक्तव्य में रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि नारी सम्मान की अनदेखी का परिणाम हमेशा विनाशकारी होता है, जैसा कि माता सीता के हरण के बाद रावण के अंत में देखने को मिला।

राजनीतिक संदेश साफ: महिला मुद्दों पर बढ़ेगा सियासी दबाव
सदन की इस बहस ने यह संकेत दे दिया है कि महिला आरक्षण अब केवल विधायी विषय नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति का केंद्र बनने जा रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष के बीच और तीखी लड़ाई देखने को मिल सकती है।

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