उर्मिला हॉस्पिटल भाटागांव में अनोखी पहल, आर्ट थेरेपी से नर्सिंग स्टाफ को मिला भावनात्मक संतुलन और नई ऊर्जा

 

उर्मिला हॉस्पिटल भाटागांव में मरीजों को बेहतर सेवा और अधिक संवेदनशील उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल के तहत आर्ट थेरेपी के माध्यम से मानसिक तनाव को कम करने और सेवा भाव को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

आर्ट थेरेपी से समझी गई मन की गहराई, भावनाओं को मिला नया रास्ता

इस प्रशिक्षण सत्र में रचनात्मक आर्ट थेरेपी की प्रशिक्षक अनु शर्मा ओझा ने नर्सिंग स्टाफ और सभी कर्मचारियों को आर्ट थेरेपी के माध्यम से प्रशिक्षित किया। कार्यक्रम की शुरुआत में सभी प्रतिभागियों से उनके प्रोफेशन से जुड़ा चित्र बनवाया गया, ताकि उनकी सोच और कार्य शैली को समझा जा सके।इसके बाद एक और गतिविधि में मन के भीतर चल रहे विचारों को चित्र के माध्यम से व्यक्त करने को कहा गया। इस अभ्यास का उद्देश्य कर्मचारियों के अंदर छिपे भावनात्मक दबाव और मानसिक स्थिति को समझना था।

मन के दबे भाव बाहर आए, भावनात्मक तनाव हुआ कम

आर्ट थेरेपी सत्र के दौरान कई कर्मचारियों ने अपनी भावनाओं को चित्रों के जरिए व्यक्त किया। इस प्रक्रिया के माध्यम से उनके मन के भीतर दबे विचार और भावनाएं सामने आईं, जिससे मानसिक बोझ हल्का हुआ।कई प्रतिभागी इस अनुभव के दौरान भावुक भी हो गए और कुछ की आंखों में आंसू भी छलक आए। इस गतिविधि ने यह साबित किया कि बिना शब्दों के भी मन की बातों को व्यक्त किया जा सकता है।

आर्ट थेरेपी क्या है, कैसे यह मानसिक स्वास्थ्य को देती है मजबूती

आर्ट थेरेपी एक उपचारात्मक प्रक्रिया है जिसमें ड्राइंग, पेंटिंग, रंग भरना और क्राफ्ट जैसी रचनात्मक गतिविधियों का उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करना होता है।यह किसी कला कौशल को निखारने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आत्म अभिव्यक्ति और भावनात्मक राहत का माध्यम है। यह तनाव, चिंता और मानसिक दबाव को कम करने में मदद करती है और आत्मविश्वास, एकाग्रता तथा संवाद क्षमता को भी बढ़ाती है।

माइंडफुलनेस और भावनात्मक संतुलन की दिशा में अहम कदम

आर्ट थेरेपी बच्चों, वयस्कों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है। यह उन लोगों के लिए भी लाभकारी है जो मानसिक तनाव, आघात या भावनात्मक चुनौतियों से गुजर रहे होते हैं।इस प्रक्रिया के माध्यम से व्यक्ति अधिक शांत, संतुलित और आत्मविश्वासी महसूस करता है। साथ ही यह बिना शब्दों के भावनाओं को व्यक्त करने का सुरक्षित माध्यम भी प्रदान करती है।

अनु शर्मा ओझा की भूमिका और रचनात्मक प्रशिक्षण का प्रभाव

आर्ट थेरेपी प्रशिक्षक अनु शर्मा ओझा एक रचनात्मक कला शिक्षिका और एक्सप्रेसिव आर्ट्स फैसिलिटेटर हैं। वे बच्चों और समुदायों को कला और उपचारात्मक गतिविधियों के जरिए सशक्त बनाने के लिए कार्य करती हैं।उनके द्वारा आयोजित इस सत्र में फैब्रिक पेंटिंग, कैलिग्राफी और क्रिएटिव लर्निंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को आत्मविश्वास, रचनात्मकता और माइंडफुलनेस का अनुभव कराया गया।

कार्यक्रम को मिला सकारात्मक समर्थन, स्टाफ ने जताया आभार

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने बेहद उपयोगी बताया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में HR दिप और शुभा मैडम की भी सराहनीय भूमिका रही, जिनके सहयोग से यह सत्र प्रभावी रूप से संपन्न हुआ।यह पहल अस्पताल में सेवा भावना को और मजबूत करने और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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