बारिश भी नहीं रोक सकी आस्था की डोर, अमलीपदर की जगन्नाथ रथयात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सागर

 गरियाबंद। हल्की बारिश की फुहारों के बीच देवभोग विकासखंड के अमलीपदर में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा पूरे धार्मिक उल्लास और परंपरागत गरिमा के साथ संपन्न हुई। मौसम की बाधाओं को दरकिनार कर हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन और रथयात्रा में शामिल होने के लिए मंदिर परिसर पहुंचे। भक्ति, संस्कृति और सामाजिक समरसता के इस महापर्व ने एक बार फिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था को जीवंत कर दिया।प्रख्यात कथावाचक पंडित युवराज पांडेय के सानिध्य में आयोजित इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। मंदिर परिसर सुबह से ही ‘बोल कालिया’ के जयघोष और भक्ति गीतों से गूंजता रहा।

भगवान के रथारूढ़ होते ही गूंज उठा जयघोष

लगातार हो रही बूंदाबांदी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पंडित युवराज पांडेय ने भगवान जगन्नाथ को अपने कंधों पर उठाकर विधिपूर्वक रथ पर विराजमान कराया। इसके साथ ही पूरा वातावरण भगवान जगन्नाथ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।पारंपरिक देव वाद्यों की मंगल ध्वनि के बीच रथयात्रा प्रारंभ हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव के साथ रथ की पवित्र डोर खींचकर स्वयं को धन्य महसूस किया। रथ के साथ चल रहे भक्तों की भक्ति और उत्साह ने आयोजन को और अधिक दिव्य बना दिया।

जनप्रतिनिधियों ने भी निभाई आस्था की सहभागिता

रथयात्रा में भाजपा प्रदेश महामंत्री पवन साय और सांसद रूप कुमारी चौधरी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। अमलीपदर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस धार्मिक आयोजन की लोकप्रियता को एक बार फिर प्रमाणित किया।

छत्तीसगढ़ महतारी के आंचल की थीम पर सजा गुंडीचा मंदिर

इस वर्ष की रथयात्रा का विशेष आकर्षण भगवान जगन्नाथ का नौ दिनों के लिए गुंडीचा मंदिर में विराजमान होना रहा। गुंडीचा मंदिर को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराओं को केंद्र में रखकर आकर्षक स्वरूप प्रदान किया गया।पंडित युवराज पांडेय ने बताया कि उनकी भावना भगवान जगन्नाथ को ‘छत्तीसगढ़ महतारी के कोरा’ में विराजमान कराने की थी। इसी अवधारणा को साकार करते हुए मंदिर परिसर में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और लोक जीवन की मनमोहक झलक प्रस्तुत की गई, जिसे श्रद्धालुओं ने विशेष रूप से सराहा।

नौ दिनों तक होंगे विशेष धार्मिक आयोजन

भगवान जगन्नाथ के गुंडीचा मंदिर में विराजमान होने के साथ ही नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हो गया है। बाहुदा यात्रा तक प्रतिदिन पांच पहर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन महाप्रसादी भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जबकि संध्या बेला में भगवान की विशेष आरती आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी।इसके साथ ही गुंडीचा मंदिर परिसर में नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

आस्था, संस्कृति और समरसता का बना अनुपम उत्सव

अमलीपदर की जगन्नाथ रथयात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सच्ची आस्था के सामने मौसम की कोई चुनौती मायने नहीं रखती। बारिश के बीच उमड़ा जनसैलाब, भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया। यह रथयात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक चेतना और लोक आस्था का जीवंत उत्सव बनकर सामने आई।

  • Related Posts

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के छत्तीसगढ़ दौरे की तैयारियां तेज, लोकभवन में अधिकारियों की बैठक

     रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 22 और 23 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी सिलसिले में लोकभवन में अधिकारियों की…

    Read more

    बच्चों को छोड़ने जा रही स्कूल बस पलटी, सभी बच्चों को आई मामूली चोट

     कवर्धा। ग्राम दामापुर और कापादाह के पास बच्चों को उनके घर छोड़ने जा रही सनराइज पब्लिक स्कूल, बिसेसरा की बस अचानक पलट गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच…

    Read more