जो मां कभी नहीं थकती, वही बच्चों के सपनों को उड़ान देती है

 

मदर्स डे पर बच्चों ने कही दिल छू लेने वाली बात — हमारी मां जैसा कोई नहीं

रायपुर। मां सिर्फ एक रिश्ता नहीं होती, वह त्याग, संघर्ष, जिम्मेदारी और प्रेरणा का ऐसा रूप होती है जो हर परिस्थिति में अपने परिवार के लिए मजबूती बनकर खड़ी रहती है। मदर्स डे के अवसर पर ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला जब आदित्य राज सिंह अपनी मां नम्रता सिंह से मिलने मुंबई से रायपुर पहुंचे और भावुक होकर कहा — हमारी मां जैसा कोई नहीं।

आदित्य राज सिंह वर्तमान में मुंबई में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि उनकी बहन आरना सिंह का चयन लंदन के प्रतिष्ठित किंग्स कॉलेज में हो चुका है और वह अगले वर्ष उच्च शिक्षा के लिए लंदन रवाना होंगी।

सुबह 5 बजे से शुरू होती है मां की जिम्मेदारियां

आदित्य बताते हैं कि उनकी मां का दिन दूसरों की सेवा से शुरू होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जब भी स्वास्थ्य शिविर आयोजित होते हैं, उस दिन भी नम्रता सिंह सुबह 5 बजे उठकर पूरे परिवार के लिए नाश्ता और बच्चों का टिफिन तैयार करती हैं। दिनभर सामाजिक कार्यों और स्वास्थ्य शिविरों में व्यस्त रहने के बाद भी शाम को घर लौटकर बच्चों की पसंद का खाना बनाना नहीं भूलतीं।

उन्होंने कहा कि इतनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद मां ने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह थक गई हैं।

दूसरों की सेवा में मिलता है आत्मिक सुख

वहीं आरना सिंह कहती हैं कि उनकी मां हमेशा एक ही बात कहती हैं — दूसरों की सेवा करने से जो आत्मिक सुख मिलता है, वही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। शायद यही वजह है कि आज उनके बच्चे भी सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं।

आरना बताती हैं कि सामाजिक गतिविधियों में लगातार सक्रिय रहने के बावजूद उनकी मां ने घर और बच्चों की जिम्मेदारियों को कभी पीछे नहीं छोड़ा। उन्होंने हर परिस्थिति में परिवार और समाज दोनों के बीच अद्भुत संतुलन बनाया।

आईपीएस बनने का सपना, लेकिन समाज सेवा नहीं छोड़ी

कम ही लोग जानते हैं कि नम्रता सिंह कभी लखनऊ में आईपीएस की तैयारी कर रही थीं। उनका सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए काम करना था। लेकिन एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी की तरह जीवन ने नया मोड़ लिया और उनका विवाह डॉक्टर डॉ विनोद सिंह के साथ हो गया।

शादी के बाद परिवार, बच्चों और उनके भविष्य की जिम्मेदारियों ने जीवन को नया आकार दिया, लेकिन समाज सेवा का जज्बा कभी कम नहीं हुआ। इसी सोच ने आगे चलकर उर्मिला फाउंडेशन की नींव रखी।

ग्रामीण स्वास्थ्य जागरूकता को बनाया मिशन

नम्रता सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता की कमी को करीब से महसूस किया। इसके बाद उन्होंने अपने फाउंडेशन के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना शुरू किया।

भाटा गांव स्थित उर्मिला हॉस्पिटल में लगातार निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। कई ऐसी महंगी जांचें, जो ग्रामीण परिवारों के लिए संभव नहीं होतीं, उन्हें फाउंडेशन के माध्यम से निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

एक मां, जिसने परिवार और समाज दोनों को संभाला

आज नम्रता सिंह के अथक प्रयासों का परिणाम है कि उनके बच्चे देश और विदेश में सफलता का परचम लहरा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर वह एक जिम्मेदार मां के साथ-साथ समाज के प्रति अपने दायित्व को भी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं।

मदर्स डे पर उनकी कहानी यह संदेश देती है कि मां कभी हार नहीं मानती। वह हर दिन अपने परिवार, अपने बच्चों और समाज के बेहतर भविष्य के लिए बिना रुके आगे बढ़ती रहती है

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